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AI से मिल रही वैक्सीन बनाने में मदद, फेस रिकॉग्निशन कोरोना मरीज पर नजर रख रहा, रोबोट कर रहे देखभाल और साफ-सफाई

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  • मर्सिडीज ने फॉर्मूला वन कारों में उपयोग की जाने वाली टेक्नोलॉजी से बनाया किफायती वेंटिलेटर
  • 3-डी मैप से कोरोना वैक्सीन बनाने में आसानी, ह्यूमन कॉन्टैक्ट से बचाने में ड्रोन और रोबोट मददगार

दैनिक भास्कर

Jun 25, 2020, 05:58 AM IST

कोरोनावायरस के चलते जब पूरी दुनिया डर के साये में जी रही है, उस वक्त में टेक्नोलॉजी हमारी सबसे बड़ी मददगार बन रही है। टेक्नोलॉजी की बदौलत हम ना सिर्फ कोरोना के खिलाफ तेजी से रिस्पांड कर पा रहे हैं, बल्कि सरकारें भी तकनीक की मदद से लोगों को भरोसा दे रही हैं।

टेक एक्सपर्ट बालेंदु दाधीच का मानना है कि टेक्नोलॉजी की सबसे बड़ी मदद तो यही है। एआई (AI), एनालिटिक्स, क्लाउड, मोबाइल, सोशल प्लेटफॉर्म्स कोरोना से इस लड़ाई में टेक्नोलॉजी के पांच सबसे मजबूत वॉरियर के रूप में दिखाई दे रहे हैं।

वहीं, टेक गुरु अभिषेक तैलंग एआई, रोबोटिक्स जैसी टेक्नोलॉजी के साथ टेक फ्यूजन के महत्व की भी बात करते हैं। चीन में मरीजों के देखभाल के लिए रोबोट को लगाया गया है जो अस्पतालों के आइसोलेशन वॉर्ड्स में दवाइयां और खाना देने का काम कर रहे हैं। मरीजों के मेडिकल वेस्ट और बेड शीट्स लेने का काम कर रहे हैं।

`लिटिल पीनट्स` नाम का एक रोबोट तो होटलों में क्वारैंटाइन किए गए लोगों तक खाना पहुंचाने का काम कर रहा है। अमेरिका में `विसी` नाम का रोबोट मेडिकल टीम और मरीज के बीच कॉर्डिनेशन का काम कर रहा है। इसी तरह कई चैटबोट्स यात्रियों को लेटेस्ट ट्रेवल प्रोसिजर की जानकारी दे रहे हैं।

कोरोना से लड़ने में टेक्नोलॉजी कैसे कर रही हमारी मदद?

  • आर्टिफीशियल इंटेलिजेंस-

बालेंदु दाधीच और अभिषेक तैलंग दोनों का ही मानना है कि कोरोना से लड़ने में टेक्नोलॉजी का मुख्य योगदान प्रोसेस को रफ्तार देने में है। इससे स्पीड बढ़ी है रिस्पांस टाइम कम हो गया है। गूगल डीप माइंड ने `अल्फा फोल्ड` सिस्टम बनाया है, जो प्रोटीन के जेनेटिक सीक्वेंस का Three डी स्ट्रक्चर प्रिडिक्ट करने में सक्षम है।

इस स्ट्रक्चर को समझने से रिसर्च करने वालों को वैक्सीन के लिए कंपोनेंट खोजने में मदद मिल रही है। इसी तरह रिलेवेंट रिसर्च पेपर को एक जगह लाने में एआई बहुत मददगार बन रही हैं। एलन इंस्टीट्यूट और गूगल डीप माइंड ने इस तरह का टूल भी बनाया है जो रिसर्चर को एक-दूसरे का रिजल्ट और डाटा आसानी से शेयर कर रहा है।

यहां क्लाउड कंप्यूटिंग की इंपॉर्टेंट भूमिका है, जो सभी नतीजों को बहुत कम समय में एक-दूसरे को मुहैया करा रहा है।

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास और वहां के नेशनल हेल्थ इंस्टीट्यूट ने बायोलॉजी टेक्नीक की मदद से वायरस के स्पाइक प्रोटीन का Three डी मैप बनाया है। जिससे वायरस के इंफेक्शन की प्रक्रिया को समझा जा सकता है। यह प्रोटीन ही आदमी के शरीर जाकर उसकी सेल को संक्रमित करने के लिए जिम्मेदार है।

इससे वैक्सीन के कंपोनेंट बनाने में मदद मिल रही है। टेक्नोलॉजी के भविष्य में जबरदस्त परिवर्तन लाने वाली एआई तकनीक में गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, अलीबाबा, बायजू जैसी कंपनियां भारी इंवेस्ट कर रही हैं।

  • फ्यूजन टेक्नोलॉजी से ब्रीदिंग उपकरण-

अभिषेक तैलंग कहते हैं कि किस तरह से टेक्नोलॉजी फ्यूजन भी कोरोना से लड़ने में हेल्प कर रहा है। मर्सिडीज फॉर्मूला वन और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के इंजीनियरों ने मिलकर फॉर्मूला वन कारों में उपयोग की जाने वाली टेक्नोलॉजी की मदद से वेंटिलेटर जैसा सीपीएपी उपकरण बनाया है, जो सीधे मरीज के फेफडों में ऑक्सीजन की सप्लाई कर सकता है।

यह उपकरण पिछले उपकरणों से 70 फीसदी कम ऑक्सीजन का इस्तेमाल कर काफी मात्रा में ऑक्सीजन की बचत भी करता है। वेल्स के ग्लेनविली अस्पताल के डॉ. रे थॉमस ने नए तरह का एक वेंटिलेटर बनाया है जो ना सिर्फ मरीजों को ऑक्सीजन देने का काम करता है, बल्कि कमरे से संक्रमित पर्टिकल को हटाकर मरीज को फ्रेश हवा देने का काम भी करता है। इस तरह के इनोवेशन पूरी दुनिया में हो रहे हैं और इनका उपयोग शुरू हो चुका है।

  • कॉन्टैक्टलेस ऑपरेशंस-

सेल्फ ड्राइविंग कार, ड्रोन और रोबोट्स उन सभी जगहों पर मददगार हैं, जहां ह्यूमन कॉन्टैक्ट से बचना है। संक्रमित लोगों या मरीजों को यहां से वहां ले जाने में इस तरह की कार बहुत मदद कर सकती है। अभिषेक तैलंग बताते हैं कि रोबोट्स मरीजों को खाना देने, उनकी स्वाब और अल्ट्रासाउंड टेस्टिंग, अस्पतालों की साफ-सफाई में मदद कर सकते हैं। इसके अलावा रोबोट जटिल सर्जरी का काम भी कर रहे हैं।

हमारे देश की बात करें तो कई अस्पतालों में रोबोट असिस्टेड सर्जरी हो रही हैं। इसके अलावा ड्रोन की सहायता से फूड डिलीवरी और मेडिसिन को क्वारैन्टाइन किए गए लोगों तक पहुंचाया जा सकता है। अपोलो कंपनी और चीन की बायजू ने इस तरह के काम के लिए `नियोलिक्स` नाम का स्टार्टअप भी बनाया है, जो सेल्फड्राइविंग व्हीकल बनाने का काम करेगा।

चीन की सबसे बड़ी कूरियर कंपनी एसएफ ने तो वुहान के अस्पतालों में मेडिकल सप्लाई के लिए बड़ी संख्या में ड्रोन का ही इस्तेमाल किया था। इसी तरह अमेरिका की एमआईटी ने एक टेक्नोलॉजी बनाई है जो मरीजों की हेल्थ को वायरलेस सिग्नल की मदद से मॉनिटर कर सकती है। इन सिग्नल को दूर बैठे डॉक्टर को भेजने का काम कर सकती है।

  • फोन से होगी कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग-

गूगल ने एपल के साथ मिलकर इस तरह की टेक्नोलॉजी बना ली है जो कोरोना मरीज के बारे में आपको जानकारी देगी। यह API एक जटिल BLB BEACON प्रोटोकॉल सिस्टम पर काम करती है जो डिफॉल्ट सर्विस के रूप में आपके फोन में रहेगी।

अभिषेक तैलंग का कहना है कि एक्सपोजर नोटिफिकेशन` नाम का यह बहुत उपयोगी API (एप्लीकेशन प्रोग्राम इंटरफेस) है, जल्द ही यह टेक्नोलॉजी आइओएस(iOS) और एंड्रोइड(Android) स्मार्ट फोन पर उपलब्ध होगी।

इसमें ब्लूटूथ की मदद से दो फोन कनैक्ट होते हैं। सहमति से डाटा शेयर होता है, जिससे इंफेक्टेड व्यक्ति के बारे में संपर्क में आए व्यक्ति को इंफॉर्मेशन मिल जाती है। हालांकि, अभी यह शुरुआती स्थिति में है, जिसका ट्रायल लगभग 22 देशों में चल रहा है। इनके नतीजे आते ही यह API देशों की पब्लिक हेल्थ एजेंसियां को सौंपी जाएगी, जिसकी मदद से वे संक्रमित व्यक्ति के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग का काम आसानी से कर पाएंगी।

  • सोशल मीडिया से ताकत और जागरूकता-

माइक्रोसॉफ्ट ने एक इंटरएक्टिव मैप बनाया है जो आपको कोरोना के बारे में सही-सही जानकारी देगा। इसी तरह लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिकटॉक ने डब्ल्यूएचओ के साथ कोरोना के बारे में सही तथ्य और जानकारी देने के लिए हाथ मिलाया है। डब्ल्यूएचओ की लाइव स्ट्रीमिंग के दौरान यूजर यहां उनसे सवाल भी पूछ सकता है।

बालेन्दु कहते हैं कि भले ही फेक न्यूज का सबसे बड़ा सोर्स सोशल मीडिया हो, लेकिन इसी ने लोगों को अवेयर करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाई है। उन्हें इम्पावर करने में, लोगों के बीच कम्युनिकेशन को बनाकर उन्हें जोड़े रखने में सोशल मीडिया का रोल अहम है। इसके बिना लॉकडाउन में आइसोलेशन की फीलिंग से निपटना मुश्किल हो जाता।

  • ट्रेकिंग के लिए फेशियल रिकॉग्निशन-

मरीजों के लिए फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी बनाई गई है। जो मास्क के बावजूद भी मरीजों के चेहरों को पहचान सकती है। इसी तरह यह टेक्नोलॉजी सीसीटीवी कैमरे के साथ काम करके क्वारैंटाइन किए गए लोगों पर भी नजर रखकर संबंधित एजेंसियों को जानकारी दे सकती है, जो क्वारैंटाइन पीरियड का पालन सही तरीके से नहीं कर रहे हैं।

दूसरे लोगों को इन संक्रमितों के बारे में जानकारी देने का काम कर सकती है। अस्पतालों में सीमित रूप से तो इसका प्रयोग शुरू हो चुका है, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जल्द ही यह टेक्नोलॉजी बड़े पैमाने में उपयोगी में आती दिखाई देने लगेगी।

  • टेली मेडिसन से रिमोट एरिया में मदद-

अमेरिका के शिकागो स्थित रश यूनिवर्सिटी के मेडिकल सेंटर ने एक वर्चुअल मेडिकल लाइन सेटअप की है जो कोरोना पेशेंट्स की जांच में मदद कर रही है। इस टेक्नोलॉजी की सहायता से वहां रिमोट एरिया में रहने वाले मरीजों की जांच में काफी मदद मिल रही है।

  • सरल और यूजफुल डिवाइस का इनोवेशन-

बालेंदु बताते हैं कि कोरोना जैसी बीमारी के खिलाफ सिंपल, लेकिन बहुत उपयोगी डिवाइस चाहिए हैं, जो लोगों को सुरक्षित रखे, इलाज में मदद करें। कई रिसर्च में यह साबित हुआ है कि कोरोनावायरस कई सर्फेस पर घंटों से लेकर कई दिनों तक जिंदा रह सकता है।

विशेषकर स्टील की सतह पर तो वायरस तीन दिन तक जीवित रहता है। दरवाजे के हैंडल सबसे कॉमन जगह हैं, जिसे दिन में कई बात टच किया जाता है। यहां संक्रमण का खतरा भी सबसे ज्यादा होता है। डोर ओपनर्स बहुत छोटा सा इनवेंशन है, जो संक्रमण रोकने में बहुत मददगार है। यह बहुत आसानी से दरवाजे को खोल सकता है। इसे आसानी से सैनिटाइज किया जा सकता है।

लंदन के डिजाइनर स्टीव ब्रुक्स ने इस तरह का एक डोर ओपनर बनाया है, जिसे `हाइजीन हुक` नाम दिया है। यह इतना छोटा है कि इसे जेब में रखा जा सकता है। इसकी सहायता से किसी भी दरवाजे को खोला जा सकता है। इसे आसानी से सैनिटाइज भी किया जा सकता है।

  • यूवी स्टेरेलाइजर वायरलेस चार्जर-

यह डिवाइस आपके मोबाइल, चार्जर, घड़ियों, ईयरफोन आदि की सर्फेस से खतरनाक जर्म्स को हटाने का काम करती हैं। यह डिवाइस मार्केट में आ चुकी है।

वेजीटेबल एंड फूड डिसइंफेक्टेंटः

इस टेक्नोलॉजी की मदद से आप सब्जियों और फलों में खतरनाक पेस्टीसाइड हटा सकते हैं। कुछ कंपनियों ने इस तरह के डिवाइस का प्रोड्क्शन शुरू किया है। यह ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं।

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फास्ट फूड डिलीवरी मिलेगी: रिलायंस बीपी मोबिलिटी लगाएगी हजारों बैटरी एक्सचेंज स्टेशन, स्विगी डिलीवरी वाहन होंगे इलेक्ट्रॉनिक

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नई दिल्ली9 घंटे पहले

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आपका भोजन आदेश अब बिजली की गति से आप तक पहुँचाया जाएगा। रिलायंस बीपी मोबिलिटी लिमिटेड और फूड डिलीवरी ऐप स्विगी ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं कि स्विगी के फूड डिलीवरी वाहन इलेक्ट्रॉनिक होंगे। इसका मतलब है कि भविष्य में स्विगी के दोपहिया वाहन बैटरी से चलने वाले इलेक्ट्रॉनिक वाहन बन जाएंगे।

जाहिर है, जब स्विगी के लाखों डिलीवरी और ऑर्डर प्राप्त करने वाले वाहन इलेक्ट्रॉनिक हो जाएंगे, तो बैटरी एक्सचेंज स्टेशनों की आवश्यकता होगी, जिसे रिलायंस बीपी मोबिलिटी अपने बैटरी एक्सचेंज स्टेशनों के साथ पूरा करेगी।

स्विगी स्टाफ को मिलेगा प्रशिक्षण
उद्योग के दो प्रमुख खिलाड़ियों के बीच इस साझेदारी का उद्देश्य एक नए बिजनेस मॉडल के माध्यम से डिलीवरी व्हीकल बेड़े को हरा-भरा और लाभदायक बनाना है। स्विगी की मदद से विभिन्न स्थानों पर जियो-बीपी बैटरी एक्सचेंज स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। रिलायंस बीपी मोबिलिटी स्विगी डिलीवरी पार्टनर्स और स्विगी कर्मियों को बैटरी परिवर्तन से संबंधित तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण प्रदान करेगी।

इस बारे में कंपनी ने यही कहा है।
रिलायंस बीपी मोबिलिटी लिमिटेड के सीईओ हरीश सी मेहता ने कहा: “आरबीएमएल इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के भारत सरकार के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। हम एक मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार कर रहे हैं जिसमें इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग सेंटर और बैटरी एक्सचेंज स्टेशन शामिल हैं। हमें विश्वास है कि स्विगी और इसके वितरण भागीदारों को बैटरी एक्सचेंज स्टेशनों के हमारे व्यापक नेटवर्क से लाभ होगा।”

स्विगी के सीईओ श्रीहर्ष मजेती ने कहा: “स्विगी के डिलीवरी वाहनों का बेड़ा प्रति दिन औसतन 80-100 किमी की यात्रा करता है और लाखों ऑर्डर देता है। हम इसके पर्यावरणीय प्रभाव से अवगत हैं और हम इसके लिए आवश्यक उपाय कर रहे हैं। संक्रमण इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसका न केवल पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, बल्कि इससे हमारे वितरण भागीदारों के मुनाफे में भी वृद्धि होगी।”

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भारत में 10,990 रुपये में लॉन्च हुआ Vivo Y12G, डुअल रियर कैमरा सेटअप और रिवर्स चार्जिंग के साथ – टेक्नोलॉजी न्यूज़, फ़र्स्टपोस्ट

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वीवो ने चुपचाप भारत में अपने स्मार्टफोन की लाइन में नवीनतम जोड़ – वीवो वाई12जी पेश कर दिया है। फोन, जो एक सिंगल 3GB रैम + 32GB स्टोरेज वैरिएंट में उपलब्ध है, को 10,990 रुपये की कीमत पर लॉन्च किया गया था। स्मार्टफोन वर्तमान में केवल वीवो वेबसाइट पर खरीदने के लिए उपलब्ध है, लेकिन भविष्य में यह अधिकांश प्रमुख ऑनलाइन शॉपिंग प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होने की उम्मीद है।

दिखने के मामले में, वीवो Y12G, Vivo Y12s के समान दिखता है, जिसे इस साल की शुरुआत में भारत में लॉन्च किया गया था।

वीवो वाई12जी फिलहाल केवल वीवो वेबसाइट पर खरीदने के लिए उपलब्ध है।

यह क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 439 SoC से लैस है और इसमें 6.51 इंच का एचडी+ हेलो फुल व्यू डिस्प्ले है। इसमें एक डुअल रियर कैमरा सेटअप (2 एमपी सेकेंडरी सेंसर के साथ 13 एमपी प्राइमरी सेंसर) और eight एमपी सेकेंडरी कैमरा है।

स्मार्टफोन साइड फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ आता है। इसमें 5,000 एमएएच की बैटरी है और यह 10 वॉट चार्ज के साथ आती है। चूंकि फोन रिवर्स चार्जिंग को भी सपोर्ट करता है, इसलिए इसका इस्तेमाल पावर बैंक जैसे उपकरणों को चार्ज करने के लिए किया जा सकता है।

वीवो वाई12जी दो रंगों में उपलब्ध है: ग्लेशियर ब्लू और फैंटम ब्लैक।

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नए Xiaomi TV की लॉन्चिंग: टीवी में होंगे सिर्फ पुराने फंक्शन, कीमत 15999 रुपये से शुरू; एलजी, टीसीएल और अन्य कंपनियों की तुलना में महंगा।

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नई दिल्लीएक घंटे पहले

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Xiaomi ने भारत में 32 इंच का Mi LED TV 4C मिड-बजट टीवी लॉन्च कर दिया है। यह एक एचडी संगत स्मार्ट टीवी है जो एंड्रॉइड टीवी पर आधारित है। इसमें अन्य एमआई टीवी की तुलना में मोटे बेजल हैं। कंपनी का दावा है कि टीवी में मी क्विक वेक फीचर को शामिल किया गया है, जो पांच सेकेंड से भी कम समय में टीवी ऑन कर देता है।

कीमत होगी 15,999 रुपये
32 इंच के मी एलईडी टीवी 4सी की कीमत 15,999 रुपये है। इसमें सिर्फ ब्लैक कलर का ही ऑप्शन मिलता है। इसे माई इंडिया की वेबसाइट से खरीदा जा सकता है। HDFC बैंक कार्ड और EasyEMI पर 1,000 का इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल सकता है।

विशेष रूप से, Xiaomi ने 2018 में Mi TV 4C Professional लॉन्च किया, जो कि 32 इंच का एचडी टीवी भी है। अभी My India की वेबसाइट के मुताबिक इसकी कीमत 16,999 रुपये है।

अन्य 32 इंच के टीवी की कीमतें

टेलीविजन कंपनी कीमत (रु.)
सैमसंग विस्मय १७,४९०
टीसीएल १३,४९०
एलजी १७,४९९
कोडक 12,499
वनप्लस 17,990
सनसुई १३,१९०

32-इंच Mi LED TV 4C के स्पेसिफिकेशन और फीचर्स

  • यह 32 इंच के एचडी डिस्प्ले (1366 x 768 पिक्सल) के साथ 60 हर्ट्ज रिफ्रेश रेट, 178 डिग्री व्यूइंग एंगल और eight एमएस रिस्पॉन्स टाइम के साथ आता है। यह Xiaomi के विविड पिक्चर इंजन पर चलता है और टीवी पैचवॉल इंटरफेस के अनुकूल है।
  • Mi क्विक वेक फंक्शन के साथ, 32 इंच का Mi LED TV 4C 5 सेकंड से भी कम समय में चालू हो सकता है। इसमें बिल्ट इन क्रोमकास्ट के साथ गूगल असिस्टेंट के लिए भी सपोर्ट है।
  • स्मार्ट टीवी Amlogic Cortrex A53 64-बिट क्वाड-कोर प्रोसेसर को सपोर्ट करता है। जिसे माली-450 एमपीThree जीपीयू के साथ जोड़ा गया है। 1GB रैम और 8GB स्टोरेज भी है।
  • कनेक्टिविटी विकल्पों में ब्लूटूथ v4.2, वाई-फाई, तीन एचडीएमआई पोर्ट शामिल हैं, जिनमें से एक एआरसी-संगत, दो यूएसबी 2.zero पोर्ट, एक एवी पोर्ट, एक ईथरनेट पोर्ट और एक हेडफोन जैक है।
  • ऑडियो के लिए दो 10W स्पीकर हैं, जो HD ऑडियो को सपोर्ट करते हैं। रिमोट वॉयस असिस्टेंट बटन के साथ आता है, साथ ही नेटफ्लिक्स और अमेज़न प्राइम वीडियो के लिए अलग-अलग बटन हैं। पैचवॉल इंटरफेस से सभी ओटीटी एप्लिकेशन की सामग्री को आसानी से खोजा जा सकता है। इसमें पैरेंटल लॉक फीचर के साथ किड्स मोड भी है। बिना स्टैंड वाले टीवी का वजन 3.87 किलो है।

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